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केन्द्रीय संग्रहालय इंदौर

केन्द्रीय संग्रहालय इंदौर की स्थापना 1923 में होलकर शासन के शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक संस्था के रूप में हुई, जिसका नाम ’नररत्न मंदिर’रखा गया। इस समय इंदौर में होलकर राजा तुकोजीराव तृतीय शासन कर रहे थे। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य महापुरूषों के चित्र, फोटो व उनके चरित्र से संबंधित दस्तावेजो को एकत्र करना था। इस संस्था में एक वाचनालय भी था तथा तब यह एम.जी.रोड पर, जहाँ वर्तमान में देवलालीकर वीथिका है, में संचालित होता था।

उक्त संस्था द्वारा जब वस्तुओं का संकलन किया जा रहा था, तो राज्य में यत्रतत्र पड़ी पुरावस्तुओं के संग्रह को देखकर इन्हें सुरक्षित रखे जाने के लिये संग्रहालय की स्थापना का निर्णय लिया गया तथा 1929 में इसी भवन में संग्रहालय की स्थापना की गयी एवं नररत्न मंदिर द्वारा संकलित वस्तुऐं संग्रहालय में विलीन कर दी गयी। यह होलकर राज्य के केन्द्र (राजधानी) में स्थापित होने के कारण संग्रहालय को केन्द्रीय संग्रहालय कहा गया। 1965 में संग्रहालय वर्तमान भवन में स्थानांतरित कर दिया गया।

संग्रहालय इस भवन में आते ही यहां पुरावस्तुओं का प्रदर्शन प्रारंभ हुआ, जिसमें समय-समय पर संग्रहालय विज्ञान व जन सामान्य की रूचि के अनुरूप बदलाव किये गये। 1975 में संग्रहालय में मुद्राओं का प्रदर्षन किया गया, जिसे देवी अहिल्या मुद्रा वीथिका नाम दिया गया। साथ ही पुरावस्तुओं व उत्खनित सामग्री के प्रदर्शन हेतु पृथक से वीथिका निर्मित की गयी, किन्तु संग्रहालय का मुख्य आकर्षण पाषाण प्रतिमायें ही रही। मंदसौर जिले के हिंगलाजगढ़ में यत्रतत्र बिखरी प्रतिमाओं के चिन्हित होने पर 1977 से चुनी हुई कलाकृतियों को संग्रहालय में लाया गया तथा 1980 में हिंगलाजगढ़ कला वीथिका के रूप में नवीन दीर्घा का निर्माण किया गया।

वर्तमान में संग्रहालय में कुल आठ दीर्घाऐं है। इनमें कलाकृतियों का विषयवार प्रदर्शन किया गया है, जो इस प्रकार है--

इंडेक्स दीर्घा एवं प्रदर्शन हॉल--

इस दीर्घा में मध्यप्रदेश के कुछ प्रमुख स्थापत्यों के मॉडल के अतिरिक्त कुछ शोकेस में लघु पाषाण प्रतिमाओं एवं अलंकृत पुरा सामग्रियों को प्रदर्शित किया गया है। इस हाल में विभाग द्वारा समय-समय पर प्रदर्शनियो का आयोजन भी किया जाता है।

किन्तु मुख्य संग्रह इसी जिले के हिंगलाजगढ़ नामक स्थान से किया गया। इस स्थान से षैव, शाक्त, वैष्णव, जैन व बौद्ध एवं व्यंतर देवी देवताओं की कलाकृतियां प्रचुर मात्रा में संकलित की गयी तथा संग्रहालय में प्रदर्शित है। इनमें प्रमुख है दशावतार, शिव एवं उसके परिवार, दिक्पाल, सूर्य, पार्वती, लक्ष्मी, सप्त मातृका, जैन यक्ष-यक्षिणियां, नायक-नायिकायें एवं कुछ बुद्ध प्रतिमायें। ये प्रतिमायें 4-5 शती ईं से 18 वीं शती ईं के मध्य की है।



पुरावस्तु वीथिकाः-

यह अत्यंत ज्ञानवर्धक वीथिका है, जिसमें पृथ्वी की उत्पत्ति, मानव विकास की गाथा तथा विभिन्न कालों में उसके द्वारा उपयोग किये गये उपकरणों का प्रदर्शन किया गया है। सिन्धुघाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो उत्खनन से प्राप्त मूल पुरातत्वीय सामग्री का भी यहां प्रदर्शन है, जो कस्टोडियन मोहनजोदड़ों द्वारा 1936-1937 में प्रदर्शन हेतु इस संग्रहालय को भेजा गया था। मध्यप्रदेश की ताम्राष्मयुगीन उत्खनन स्थलों यथा कायथा, आवरा, नावदाटोली, दंगवाड़ा, आजाद नगर, खेड़ा, पगारा व कसरावद उत्खनन से प्राप्त मृदभाण्ड, टेराकोटा, मनके, चूडियां व अन्य सामग्रियों को प्रदर्शित किया गया है।




अभिलेख वीथिकाः-

इस दीर्घा में अभिलेख व ताम्रपत्रों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें राष्ट्रकूट राजा नन्नप का 710 ईं. का शिलालेख, मण्डप दुर्ग व ओखला का शिलालेख, धार जिले के बाघ से प्राप्त गुप्तों के सामन्त वलख (राजाओं) के 28 ताम्रपत्र, राजा भोजदेव परमार के दानपत्र व राजपूत कालीन ताम्रपत्रों का प्रदर्शन है।

मुद्रा वीथिकाः-

इस दीर्घा में सिक्कों के प्रचलन में आने की कहानी के बाद प्रमुख सिक्कों को कालखण्ड के अनुरूप प्रदर्शित किया गया है। इनमें प्रमुख है आहत मुद्रा, जनपदीय मुद्रा, उज्जैयनी सिक्के, कुषाण, क्षत्रप, नाग, वल्लभी, रोमन, इण्डो ससानियन एवं गधैया सिक्के, गुप्त, कुल्चूरी, परमार, दिल्ली सुल्तान, मालवा सुल्तान, मुगल, परिवर्ती मुगल व होलकर कालीन मुद्राऐं। दीर्घा में सिक्कों पर अंकित किये जाने वाले चिन्हों की डाईंया भी प्रदर्शित है।

इतावली एवं समकालीन कला वीथिकाः-

इस दीर्घा में संगमरमर की कलाकृतियों के अतिरिक्त हाथी दांत का लोटा, चित्रित प्लेट, टांक, धातु प्रतिमायें एवं इंदौर तथा भोपाल रियासतों के पदक प्रदर्शित है।

अस्त्र-शस्त्र दीर्घाः-

इस दीर्घा में अस्त्र शस्त्रों के प्रारंभिक काल से किस प्रकार विकास हुआ को दर्शाते हुए मराठा, राजपूत व मुगल तथा ब्रिटिश अस्त्र शस्त्रों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें प्रमुख है तलवार, ढाल, डेगर, खोचा, गुप्ती आदि।

विभिन्न प्रकार की बन्दुकें जैसे फ्लिंटलाक, मेचलाक, जजैल, पिस्टल, रिवाल्वर, हंटिंग गन, पेन पिस्टल आदि को यहां प्रदर्शित किया गया है। दीर्घा में तोप व तोप के सांचो को भी प्रदर्शित किया गया है।




समकालीन चित्रकला वीथिकाः-

इस वीथिका में ब्रिटिश, मराठा एवं राजपूत शैली के फोटोग्राफस् एवं पेंटिंग्स्, जो 20वीं शती ईं के है, को प्रदर्शित किया गया है। इनमें इंदौर के कुछ चित्रकारों यथा देवलालीकर, श्रेणिक जैन, मिर्जा इस्माईल बेग आदि की कृतियां भी प्रदर्शित है। साथ ही बाघ गुफाओं के चित्रों की प्रतिकृतियां, जो एल.एन. भावसार एवं मिर्जा इस्माईल बेग द्वारा बनायी गयी है. को भी प्रदर्शित किया गया है। इनकी मूल पेंटिंग अब बाघ गुफाओं में उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त संग्रहालय के खुले प्रांगण में भी अनेक कलाकृतियां एवं तोपों को प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रहालय के प्रांगण में सिरपुर (छत्तीसगढ़) के ईंट निर्मित लक्ष्मण मंदिर एवं बेसनगर के हेलियोडोरस के गरूढ़ध्वज की प्रतिकृति को भी प्रदर्शित किया गया है।

 








संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय

संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक। प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।

प्रवेश शुल्क:

भारतीय नागरिक रू. 10.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क) विदेशी नागरिक रू. 100.00 प्रति व्यक्ति फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा विडियोगा्रफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा

प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।