Directorate of Archaeology, Archives and Museums

Government of Madhya Pradesh

Local Museum Gwalior

संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।

प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।

 
Gujri-Mahal-Museum

संचालनालय द्वारा वर्ष 1977 में पिछोर संग्रहालय स्थापित किया गया है । स्थानीय संग्रहालय पिछोर ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के पिछोर ग्राम में स्थित है । उक्त संग्रहालय डबरा से 8 कि.मी. दूरी एवं ग्वालियर से 32 कि.मी. की दूरी पर स्थित है ।

पिछोर के इतिहास के प्रमाण हमें मध्यकाल से मिलना प्रारम्भ हो जाते हैं। पिछोर का पुराना नाम ‘चम्पा नगरी’था जो तोमर राजपूत राजाओं एव मुस्लिम शासकों के मध्य हुए युद्ध में नष्ट हो गई। 1675 ईस्वी में इस क्षेत्र पर बुन्देला शासक राजवीर वृषभदेव सिंह का राज्य था। वर्तमान में किले के उत्तरी पश्चिमी भाग का निर्माण भी राजवीर बुन्देला ने कराया था, बुन्देलों का इस क्षेत्र पर लम्बे समय तक शासन रहा, बाद में जाट राजाओं ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। जाटों ने अनेक किले व गढ़ीयों का निर्माण कराया था, पिछोर के किले में भी जाटों ने महल एवं बावड़ी का निर्माण कराया जिसका उपयोग 1847 तक जाट करते रहे। 1847 में पहाड़ सिंह जाट से यह किला अंग्रेजों और महादजी सिंधिया ने खाली करवा लिया। पहाड़ सिंह के सैनिक सिंधिया सेना में सम्मलित हो गये। 1852 ईस्वीं में यह क्षेत्र सिंधिया सरदार दिनकर राव के प्रभाव में था, और उन्होंने इसे तहसील बनाया। वर्तमान में पिछोर में डबरा तहसील का टप्पा मुख्यालय है।

जाटों द्वारा अनेक क्षेत्रों में निर्मित गढ़ियों में से पिछोर में भी 16-17 वी.शताब्दी में एक गढ़ी निर्मित की गई थी। उक्त निर्मित गढ़ी में ही पिछोर संग्रहालय स्थापित है। संग्रहालय में आसपास के क्षेत्र से एकत्रित प्रतिमाओ को संग्रहीत कर प्रदर्शित किया गया है। इन प्रतिमाओं में जैन धर्म एवं सूर्य प्रतिमाऐं अधिकाधिक संख्या में है। संग्रहालय भवन के अंदर दरबार हाल एवं प्रांगण में प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है। यहां पर 90 प्रतिमायें प्रदर्शित होकर यह संग्रहालय आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।