Directorate of Archaeology, Archives and Museums

Government of Madhya Pradesh

Local Museum Maheswar

संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय समय - प्रातः 10-00 से शाम 5-00 तक

प्रवेश शुल्क


भारतीय दर्शक -रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)


विदेषी दर्शक - रू. 50.00 प्रति व्यक्ति

फोटोग्राफी - रू. 50.00 प्रति कैमरा


विडियों ग्राफी - रू. 200.00 प्रति कैमरा

नोटः-

  1. प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।
  2. प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
Gujri-Mahal-Museum

महेश्वर (माहिष्मति) नगर पश्चिमी निमाड़, खरगोन जिला, नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित है। इंदौर से महेश्वर 78 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में तथा जिला मुख्यालय खरगोन से 75 किलोमीटर दूरी पर है।

महेश्वर की स्थापना के बारे में पुराणों में उल्लेख मिलता है। मान्धाता के तृतीय पुत्र मुचुकुन्द द्वारा नर्मदा नदी के तट पर ऋक्ष एवं पारियात्र पर्वतों के मध्य नगर बसाऐ जाने का उल्लेख मिलता है। जिसे हैहय महिष्मान ने विजित कर माहिष्मति नाम रखा। हैहय वंशी सम्राट सहस्त्रार्जुन कार्तवीर्य ने कार्कोटक नागों को पराजित कर माहिष्मति को अपनी राजधानी बनाया था। लगभग 7वीं शदी में कलचुरी नरेशों के पश्चात 18वीं शती ई. में पुनः होलकर राजाओं ने महेश्वर को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया।

Gujri-Mahal-Museum

देवी अहिल्याबाई होलकर ने 1767 ई. में महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। महेश्वर एवं नावदाटोली में सन् 1952-53 में तथा कसरावद में 1936 ई. में पुरातात्विक उत्खनन हुए। उत्खननों में पाषाण काल से लेकर 18 वीं शती ई. तक के सभ्यता के सांस्कृतिक अवशेष मिले यथा प्रागऐतिहासिक काल से लेकर मराठा काल तक के पुरावशेष ताम्र उपकरण, मनके तथा आहत मुद्राऐं से लेकर 19वीं शती तक की मुद्राऐ प्राप्त हुई है।

Gujri-Mahal-Museum

वर्तमान में महेश्वर की सांस्कृतिक विरासत के रूप में यहां विशाल किला, देवी अहिल्याबाई द्वारा निर्मित होलकर राजबाड़ा एवं स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तथा देश के अग्रणी सुन्दर घाट नर्मदा नदी पर बने हुए है। यहां के मंदिरो में कालेश्वर, जालेश्वर, काशी-विश्वनाथ, राजराजेश्वर पंढरीनाथ एवं लक्ष्मी मंदिर प्रमुख है। किले के घाट के मार्ग पर देवी अहिल्या की छत्री एवं सरदार विट्ठलराव की छत्रियां प्रमुख है। जिसका निर्माण होलकर शासक यशवंतराव प्रथम द्वारा कराया गया है। इन सभी मंदिरों में मराठाकाल की वास्तुकला की झलक मिलती है। मंदिरो पर पुष्पवल्लरी, देवी-देवता, द्वारपाल, पशु-पक्षी एवं सुन्दर नक्कासी अंकन है। महेश्वर से 7 किलोमीटर पर पश्चिम दिशा में सहस्त्रधारा नामक दर्शनीय स्थल है। यहां नर्मदा की अनेक धाराऐं प्रभावित होती है।

Gujri-Mahal-Museum