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District Archaeological Museum Dhar

जिला पुरातत्व संग्रहालय, धार

स्थितिः-

धार जिला म.प्र. के दक्षिण-पश्चिम भाग में 22.36 उत्तरी अक्षांश एवं 75.19 पूर्वी देशान्तर पर समुद्र तल से 588.0 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। जिले के उत्तर में रतलाम और उज्जैन जिले तथा दक्षिण-पूर्व में पूर्वी निमाड़ है। पूर्व में इन्दौर व पश्चिम में झाबुआ जिला है। यह पश्चिम रेलवे के छोटी लाइन (नेरोगेज)के इन्दौर-खण्डवा अनुभाग पर निकटतम रेलवे स्टेशन महू से 55 कि.मी. तथा इन्दौर से इसकी दूरी 68 कि.मी. है।
परमार काल के इतिहास में धार का अस्तिव्व “धारा-पद्रक” नाम से गाँव के रूप ज्ञात होता है। मुसलमानों के शासन काल में यहाँ अनेक पीरों का निवास रहा जिस वजह से धार को “पीरन-धार” भी कहा गया।



धार संग्रहालयः

जिला पुरातत्व संग्रहालय धार की स्थापना तत्कालीन धार रियासत के शासक महाराजा उदाजीराव पवांर द्वितीय (1898-1928) द्वारा ई. सन् 1902 में की गई। यद्यपि धार में पुरातत्वीय सामग्री के संकलन के प्रति तत्कालीन महाराजा को ई. सन् 1875 में रूचि पैदा हो गई थी। जब उन्हे धार में सिटी पैलेस के समीप मलबे से पुरासामग्री प्राप्त हुई। भोपावर छावनी के राजनैतिक एजेंट मेजर किनचाइड ने कई प्रतिमाये संकलित की। इनमें धार की भोजशाला से प्राप्त सरस्वती भी एक थी, जो ब्रिटिश संग्रहालय लंदन में प्रदर्शित है।
कैप्टन वार्नस एवं मिसेज वार्नेज को पुरातत्व के क्षेत्र में गहरी रूचि थी, परिणाम स्वरूप धार में राज्य रतन श्री के.के.लेले के नेतृत्व में पुरातत्व विभाग स्थापित हुआ। श्री के.के.लेले के प्रयास से भोजशाला परिसर से कई अभिलेख प्रकाश में आये। इन अभिलेखों के अध्ययन के लिये देश के कई बड़े-बड़े विद्वानों यथा-डॉ. फुहरर, ब्यूलर, जे.ए. कैम्पवेल, पिस्चेल, कीलहर्न आदि यूरोपीय विद्वान एवं रायबहादुर गौरी-शंकर ओझा, डॉ. डी.आर. भंडारकर, डॉ. हीरालाल आदि भारतीय विद्वान धार पधारे और प्राप्त अभिलेखों को प्रकाशित कराया गया इनमें कुछ अभिलेखों के टुकड़े आज भी इस संग्रहालय में संग्रहीत हैं।

धार संग्रहालय प्रदेश का प्राचीनतम संग्रहालय है। प्रारम्भ में ये संग्रहालय बिक्टोरिया लाईबेरी में 1939 ई. सन् तक संचालित रहा तत्पश्चात इसे उटावद दरवाजा स्थित चर्च भवन में स्थानान्तरित किया गया। माह अक्टूम्बर 2010 से यह संग्रहालय धार किला स्थित जेल भवन में संचालित है।
ऐतिहासिक दुर्ग धारा-धीश सम्राट भोज देव परमार (1010-1055 ई सन्) के समय “धारा-गिरि-लीलोद्यान” के नाम से प्रसिद्ध था। यह राजा भोज की प्रमुख बैठक हुआ करता था परवर्ती परमार शासकों ने “धारा-गिरि-लीलोद्यान” का दुर्गीकरण किया। 13वी शताब्दी के उत्तरार्द्ध मे परमार प्रधानमंत्री गोगा चैहान के नेतृत्व मे धारा गिरि एक सैन्य केन्द्र था। ई॰ सन् 1305 मे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय आइनुल-मुल्क-मुल्तानी ने प्रवेश द्वार तोड़कर दुर्ग पर कब्जा कर लिया यह दिल्ली सल्तनत का प्रथम गवर्नर था, का निवास इस किले मे रहा। किले का जीर्णाद्धार आइनुल-मुल्क-मुल्तानी के समय प्रांरभ हुआ और दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद शाह तुगलक के शासन काल मे ई. सन् 1344 में पूर्ण हुआ। जिसमे प्रवेश द्वार प्राकार के ऊपर कंगूरे व मोर्चे एवं अंतः भाग मे बैरकस, शीशमहल, हम्माम आदि का निर्माण कराया। परमार कालीन बावडी मे सुरक्षा हेतु ऊपरी भित्तियां निर्मित करवायीं।
आइनुल-मुल्क-मुल्तानी ने परमार शासकों के “धारा-गिरि-लीलोद्यान” दुर्ग को एक सुदृढ़ मैदानी दुर्ग मे परिवर्तित कर दिया। परमार कालीन निर्मित बावड़ी के निकले प्रस्तर खंड़ों को पुनः दुर्ग के भीतर मुस्लिमकालीन निर्माण मे उपयोग किया। अतः मालवा की ऐतिहासिक नगरी धार मे स्थित यह प्राचीन दुर्ग एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है।
धार दुर्ग के अन्दर स्थित इस संग्रहालय में प्रस्तर प्रतिमाए, स्थापत्य खण्ड़, अभिलेख, मुद्राए, अलंकृत वस्तुए व अन्य पुरासामग्री संग्रहीत है। वर्तमान में 6 दीर्घायं हैं, जिनमें क्रमश: पुरावस्तु वीथिका, मुद्रा वीथिका, अभिलेख वीथिका, मूर्तिकला वीथिकाओं में यथा-शैव, शाक्त, वैष्णव, जैन एवं अन्य मूर्तिकला विथिका वीथिका तथा ललितकला वीथिका व आदिवासी लोककला वीथिका प्रदर्शित है। उधान प्रांगण में मुक्ताकाश प्रदर्शन भी किया गया है।

संग्रहालय के अन्य संग्रह में पदक (मेडल), चित्रित कार्ड (ताश के पत्ते जैसा), सील धातु (हिंदी मे तथा उर्दू/अरबी भाषा में लेख उत्कीर्ण), गुलदस्ता, मारबल प्रस्तर निर्मित फ्लावर पॅाट् का भाग गोल नारियलनुमा, ऊपरी भाग आमलक के समान, नीचे का भाग सुराही जैसा आदि प्रमुख हैं।





संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।
प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
प्रवेश शुल्क
भारतीय नागरिक रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)
विदेशी नागरिक रू. 50.00 प्रति व्यक्ति
फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा
विडियोग्राफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा
प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।