आप यहाँ हैं   >>   Skip Navigation Linksहोम > संग्रहालय > जिला स्तर संग्रहालय
District Archaeological Museum Panna

जिला पुरातत्व संग्रहालय, पन्ना

परिचय-

जिला पुरातत्व संग्रहालय हिन्दूपत महल पन्ना म.प्र. पुरातत्व संग्रहालय द्वारा संचालित जिला स्तरीय प्रमुख संग्रहालय है। म.प्र. के पुरातत्व संघो में सर्वप्रथम 1958-59 में जिला पुरातत्व संघ पन्ना की स्थापना हुई और संघ के प्रयत्नों से राजेन्द्र उद्यान में प्रतिमाओं को मुक्ताकाश में प्रदर्शित किया गया है। वर्ष 1988 में हिन्दूपत महल में स्थांनातरित किया गया, इस महल का निर्माण छत्रसाल के प्रपोत्र एंव राजा सभासिंह के पुत्र महाराजा हिन्दूपत द्वारा ई. सन् 1758 से 1776 के मध्य करवाया गया था। बुन्देला वास्तुकला का प्रतीक पन्ना शहर के मध्य में स्थित उत्तराभिमुखी बुन्देली शैली का भव्य प्रासाद है। संग्रहालय में शैव, शाक्त, वैष्णव व्यंतरदेव एवं विविध कलाकृतियां, जैन प्रतिमाएं धातु प्रतिमाऐं, सिक्के, अभिलेख, तोप सुरक्षित एवं प्रदर्शित है।

शैव प्रतिमाऐं-

संग्रहालय में पन्ना शहर एवं ग्रामों से संकलित महत्वपूर्ण शैव प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शित प्रतिमाओं में से शिव पार्वती युगल स्वरूप में, उमा-महेश्वर, रावणानुग्रह, त्रिपुरान्तक शिव, लकुलीश गजासुर संहार शिव की प्रतिमाऐं उल्लेखनीय है। शिव के रौद्र रूप में भैरव, शिव व विष्णु का संयुक्त रूप हरिहर एवं शिव ब्रम्हा, सूर्य का संयुक्त स्वरूप, हरिहर ब्रम्हार्क की प्रतिमा, अष्टभुजी शिव आदि है। ये प्रतिमाऐं शिल्प कला के उच्च मापदंडो को प्रदर्शित करती है। शिव परिवार देवा में कार्तिकेय, गणेश, नृत्य गणेश, नंदी शरीर मानव, मुख नंदी के स्वरूप में नंदीश्वर की प्रतिमा उल्लेखनीय है। संग्रहालय नांदचांद से प्राप्त उत्तर गुप्तकालीन विषालकाय शिव द्वारपाल की प्रतिमा विशेष आकर्षण है। ये प्रतिमाऐं गुप्तोत्तरकाल से चंदेल काल तक की कला का प्रतिनिधित्व करती है।


शाक्त प्रतिमाऐं-

संग्रहालय में पन्ना जिले से प्राप्त शाक्त प्रतिमाऐं 5वीं-6वीं शती गुप्तोत्तरकाल से 12वीं शती ई. चन्देलों के समय की है। इसमें मनसा देवी पार्वती, मातृका, चामुण्डा, वराही की स्वतंत्र प्रतिमाएं है। मातृका वराही का मुख वराह का व शरीर मानव का है, तो वैनायकी प्रतिमा में चेहरा हाथी का तथा शरीर मानव का है। संग्रहालय में सुरक्षित ये प्रतिमाऐं अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है। इन प्रतिमाओं में शिल्पी के युगविशेष के प्रचलित शिल्प शास्त्रीय सिद्धान्तो के साथ-साथ आंचालिक विशेषताओं का समावेश भी किया गया है। इन प्रतिमाओं में सहज, सरल एवं स्वाभाविक अभिव्यक्ति को सुघटित देह यष्टि और मांसल सौदर्य के साथ शिल्पी ने बारीकी से तराशा है।



वैष्णव प्रतिमाऐं:-

संग्रहालय में गुप्त काल से लगभग 13वीं शती ई. तक की महत्वपूर्ण प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। ये सभी प्रतिमा पन्ना जिले से प्राप्त हुई है। इन प्रतिमाओं में विष्णु शेषशैया पर लेटे शेषशायी नारायण, विष्णु के दशावतारों में नृसिंह, वामन, राम, सीता विशेष उल्लेखनीय है।






व्यंतर देव एवं विविध कलाकृतियां

संग्रहालय में पन्ना जिले के ग्रामों से प्राप्त व्यंतर देव एवं विविध कलाकृतियां सुरक्षित है। इन प्रतिमाओं में सूर्य, दिकपाल, इशान, नागपुरूष, यक्ष, यक्षी, मिथुन, युगल दम्पति, अप्सरा, गन्धर्व कीचक, अश्वरोही, सती स्तम्भ, सिरदल, गज, सिंह, स्थापत्य, खण्ड एवं अन्य प्रतिमाऐं उल्लेखनीय है। इनमें यक्ष-यक्षी की गुप्तोत्तर काल की दुलर्भ कृतियां है।

जैन प्रतिमाऐं:-

संग्रहालय में पन्ना जिले के विभिन्न स्थानों से संग्रहित जैनमत से संबंधित महत्वपूर्ण कलाकृतियों को प्रदर्शित की गई है। इनमें तीर्थंकर आदिनाथ, सम्भवनाथ, सुमतिनाथ, सुपार्श्वनाथ, पुष्प दंत, आदिनाथ, विमलनाथ, द्विमूर्तिका, लांछन विहीन तीर्थंकर प्रतिमा एवं जैन प्रतिमाओं से संबंधित शिल्पखंड प्रदर्शित है। ये प्रतिमाऐं 6वीं शती ई. से 10वीं-11वीं शती ई. तक की है। मूर्तिशिल्प की उत्कृष्टता की परिचायक इन प्रतिमाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति पर मूर्तिकार द्वारा विशेष प्रयास किया गया है। उत्तर गुप्तकाल की दो तीर्थंकर मूर्तियां भारतीय कला की अधिक सुन्दर एवं पुरातत्वीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

धातु प्रतिमाऐं:-

संग्रहालय में पीतल से निर्मित लगभग 19वीं शती ई. की कृष्ण नृत्यमुद्रा में चतुर्भुजी है। आगे के दोनो हाथ नृत्यमुद्रा को प्रदर्शित करते हूए प्रदर्शित किये गये हे। इनमें भगवान मुरली धारण किये हुए है। राधा की प्रतिमाऐं कमलासन पर स्थानक मुद्रा में खड़ी है। दांयी भुजा अभयमुद्रा में बायीं भुजा व्याख्यान मुद्रा में है। राधा कृष्ण की दोनो प्रतिमा पारम्परिक आभूषण पहने हुऐ है।

सिक्के:-

संग्रहालय में कुल 568 चांदी एवं ताम्बे के सिक्के सुरक्षित है। ये सिक्के मुगल, मराठा एंव ब्रिटिशकाल के है। मुगल सिक्को में औरंगजेब, मुहम्मदशाह, अहमदशाह, आलमगीर द्वितीय के सिक्के है। ये सिक्के क्षेत्रीय इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

अभिलेख:-

संग्रहालय में दो सती स्तम्भ लेख है प्रथम अभिलेख सात पंक्तियों का है, जिसकी तिथि विक्रम संवत् 1324 ई. सन् 1267 है। इसमें महेंन्द्रा ग्राम का उल्लेख है, जो पन्ना जिले की पवई तहसील में है। दूसरा अभिलेख पांच पंक्तियों का है, जिसकी तिथि विक्रम संवत् 1714 ई. सन् 1657 है। दोनो अभिलेख क्षेत्रीय पंरम्परागत इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।





संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय
संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।
प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
प्रवेश शुल्क
भारतीय नागरिक रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)
विदेशी नागरिक रू. 50.00 प्रति व्यक्ति
फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा
विडियोग्राफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा
प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।