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District Archaeological Museum Rewa

जिला पुरातत्व संग्रहालय, रीवा

रीवा नगर का गौरव व्यंकट भवन नगर के मध्य कोठी कम्पाउण्ड में स्थित है। इस भवन का निर्माण रीवा के 32वें महाराजा श्री व्यंकट रमण सिंह जूदेव द्वारा सन 1908 में करवाया गया था। प्रथमतल भवन के भूतल के बाद प्रथम तल पर पहॅुचनें के लिये प्रस्तर निर्मित सीढ़ियों के दोनों तरफ बनी प्रस्तर निर्मित रेलिंग भव्य एवं आकर्षक है, इस सभागार में 12 दरवाजें है एवं वृत्ताकार विशाल सभागार बिना स्तंभों के बना हुआ है यह इसकी भव्यता का सूचक है। व्यंकट भवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भूमिगत गलियारा सुरंग है जो कि भवन के दक्षिणी बुर्ज से नीचे सुंरग में एवं ऊपर सीढियों के द्वारा प्रथम तल एवं भवन की छत तक जाता है। इस सुरंग की सामान्य चैड़ाई 14 फीट एंव ऊचाई 13 फीट है।



संग्रहालय का संग्रह-

ऐतिहासिक स्मारक व्यंकट भवन में मध्यप्रदेश शासन का संग्रहालय वर्ष 1988 से संचालित हो रहा है। इस संग्रहालय में संग्रहीत पुरावशेषो में पाषाण प्रतिमाऐं, सिक्के, मनके, काष्ठ सामग्री, पेंटिग आदि का संग्रह है। संग्रहालय में कुल 468 पुरावशेष संग्रहित किये गये है, जिनमें चांदी के सिक्के 56 नग, ताम्बे के सिक्के 44 नग, सोने की परत लगे 3 नग मनके पाषाण प्रतिमाऐं 219 नग भण्डार ग्रह में है, 136 नग पाषाण प्रतिमाऐं दर्शकों के लिये प्रदर्शित किये गये है। भवन में दो तलों में प्रदर्शन किया गया है।

1-प्रवेश कक्ष-

संग्रहालय के इस कक्ष में तीन पाषाण प्रतिमाऐं दो गणेश एंव एक नर्तक की प्रतिमाऐं प्रदर्शित है तथा दीवारों पर चार चीतें के कटे हुए सिर मशालों युक्त प्रदर्शित है इसके अलावा कुछ छायाचित्र रीवा राज परिवार से संबंधित लगे हुए है जिनके विषय सैनिक अभियान एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से संबंधित है तथा दो आदम कद पेंटिग महाराजा व्यंकट रमण सिंह जूदेव के लगे हुए है। व्यंकट भवन के विहंगम दृष्य का छायाचित्र भी विवरण सहित लगाया गया है।





गुर्गी वीथिका-

गुर्गी रीवा जिले की हुजूर तहसील के अंतर्गत रीवा से लगभग 16 कि.मी. दूर रीवा गुढ़ मार्ग पर स्थित है। इस वीथिका में 27 नग पाषाण प्रतिमाऐं प्रदर्शित की गई है जिनमें गणेश, वैष्णव, ब्रम्हा, नायिका आदि की प्रतिमाऐं प्रमुख है।






मुक्ताकाश प्रदर्शन-

गुर्गी वीथिका के बाह्य भवन के बाहर उद्यान पर चारों तरफ सीमेंट के पादपीठों में कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। जो शैव, वैष्णव, शाक्त, जैन, एवं व्यंतर देव देवी आदि सम्प्रदायों से संबंधित हैं। इनमें योगिनी, तीर्थंकर, नंदीकेश्वर, उमा-महेश्वर, लक्ष्मी नारायण, अप्सराऐं शिलालेख अलंकृत स्थापत्य खंड है। ये सभी कल्चुरि शिल्पकला का प्रतिनिधित्व करते हुए लगभग 10-11वीं शती ई. की है। जहां इन्द्र एवं अग्नि, वरूण एवं वायु दिकपाल प्रतिमाऐं दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती है वही अप्सराऐं अपनी भावभंगिमाओं से मन को मोहित करती है। उमा-महेश्वर, शिव, भैरव, नंदीकेश्वर प्रतिमाऐं शैव सम्प्रदाय के अनुपम उदाहरण है तो लक्ष्मी नारायण, विष्णु प्रतिमाऐं इस क्षेत्र में वैष्णव सम्प्रदाय की मान्यता का स्पष्टीकरण है। सप्तमातिृका, चामुण्डा, सिंहवाहिनी, पार्वती प्रतिमाऐं शक्ति सम्प्रदाय एवं सूर्यप्रतिमा सौर सम्प्रदाय का प्रतिनिधित्व करती है। जैन एवं बौद्ध प्रतिमाऐं भी इस प्रदर्शन का अंग है। जो इस क्षेत्र में इन सम्प्रदायों की उपस्थिति का द्योतक है।

यद्यपि यहां पर प्रदर्शित कलाकृतियां अधिकतर कलचुरि कला से संबंधित है तथापि अन्य धर्मों एवं सम्प्रदायों के प्रति भी सहिष्णुता का भाव कलचुरि शासकों की एक विशेषता थी। वैसे कलचुरि षासक परम शैव भक्त थे। संग्रहालय के प्रथम तल में 4 कक्ष एवं एक सभागार है। जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकार का प्रदर्शन किया गया है।

सभागार-

प्रवेश कक्ष से लगे विशाल सभागार प्रदर्शन को हम तीन भागों में बांट सकते है जिनका विवरण अधोलिखित है-

(अ) पाषाण प्रतिमाऐं-

इस विशालकक्ष में संग्रहालय की महत्वपूर्ण कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें पद्यमावती, महिषासुर मर्दिनी, कृष्ण लीला, विष्णु आदि है जो जैन, शाक्त एवं वैष्णव सम्प्रदाय का प्रतिनिधित्व करती है। इनका प्रतिमा शास्त्रीय अध्ययन अलग अध्याय में किया जावेगा।






(ब) पेंटिंग-

सभागार की दीवालों पर पेंटिंग लगाई गई है। जिनके विषय धार्मिक एवं अन्य है। कृष्ण, शिव विवाह, त्रिमुखी देव दत्तात्रेय, सरस्वती देवी, गांधी जी, रविन्द्र नाथ टैगोर, कपिल ऋषि आदि के चित्र प्रदर्शित हैं।






काष्ठ सामग्री-

रीवा राज परिवार से प्राप्त लकड़ी की कलात्मक सामग्री का प्रदर्शन किया गया है। जिसमें दो बड़ी ड्रेसिंग टेबिल, चार छोटी, चार सादी एवं दो लकड़ी में लगे कांच के कलात्मक पार्टीशन बोर्ड है। बड़ी ड्रेसिंग टेबिल जो पांच खण्डों में निर्मित है छोटी ड्रेसिंग टेबिल को चार खण्डों में लता एवं पुष्प बल्लरियों के अंकन के साथ चित्रयुक्त अलंकरण भी है। सादे मेहरावदार खंण्ड बनाये गये है तथा ड्रेसिंग टेबिल में सुन्दर कांच लगे है।





प्रतिमा दीर्घा-

सभागार से लगी इस पाषाण दीर्घा में रीवा के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त प्रतिनिधि कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया है। जिसमें नृसिंह, उमा-महेश्वर, भैरव, गौरी प्रतिमा है। जो कलचुरि कला शैली का प्रतिनिधित्व करती है जो लगभग 11वीं शती ई. की है। इसके अलावा इस दीर्घा में राज परिवार से संबंधित छायाचित्र भी लगे हुए है।

भण्डार गृह में रखे महत्वपूर्ण पुरावषेष-

रीवा संग्रहालय के भण्डार गृह में रखे पुरावशेषो में प्रतिमाऐं, सिक्के, मनके का संग्रह है। भण्डार गृह में रखी कलाकृतियों शैव, शाक्त, वैष्णव, जैन, व्यंतर देव आदि प्रकार के है जो कलचुरि कला का प्रतिनिधित्व करते हुए अधिकतर 11वीं शती ई. के है। कुछ पुरावशेष जो देउर कोठार से प्राप्त 2वीं शती ई. पूर्व के स्तूप के हिस्से है। सिक्के रीवा के महाराजा जय सिंह देव के समय के है जिनका काल 19वीं शती ई. है।

संग्रहालय की प्रतिनिधि कलाकृतियां-

रीवा संग्रहालय में संग्रहीत कलाकृतयों में कुछ प्रतिमाएं अपनी कलात्मकता के कारण एवं कुछ अपनी विशालता के कारण कला जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं इनमें महासरस्वती, तीर्थंकर, हरिहरार्क,हरिहर, धनवंतरी आदि प्रमुख हैं।






संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय
संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।
प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
प्रवेश शुल्क
भारतीय नागरिक रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)
विदेशी नागरिक रू. 50.00 प्रति व्यक्ति
फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा
विडियोग्राफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा