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District Archaeological Museum Shahdol

जिला पुरातत्व संग्रहालय, शहडोल

स्थिति

शहडोल जिला व संभाग मध्य प्रदेश की पूर्वी सीमा पर विन्ध्य भू-भाग के 22.28 से 24.20 उत्तरी अक्षांश तथा 81.0 से 82.12 पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। जिला शहडोल के उत्तर में सतना, उत्तर पूर्व में सीधी, दक्षिण में डिण्डौरी, पश्चिम में उमरिया जिला तथा पूर्व में अनूपपुर जिला तथा छतीसगढ़ के कोरिया जिलों की सीमाऐं है। जिला पुरातत्व संग्रहालय शहर के मध्य कलेक्टेªट से कोतवाली मार्ग पर पर गांधी स्टेडियम के बांये पार्श्व में स्थित है।

स्थापना

जिला पुरातत्व संग्रहालय शहडोल की स्थापना वर्ष 1981 में म.प्र. शासन के पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा की गई। इस संग्रहालय में विन्ध्य क्षेत्र के शहडोल, उमारिया तथा अनूपपुर जिले में बिखरी कलाकृतियों को संग्रहीत कर प्रदर्शित किया गया है, संग्रह में हिन्दू एवं जैन धर्म की प्रतिमाओं के अलावा व्यंतर देव-देवी प्रतिमाऐं है। हिन्दू प्रतिमाओं में शैव, शाक्त, वैष्णव एवं सौर प्रतिमाओं का बाहुल्य है। यहां की विविध कलाकृतियां इस क्षेत्र के अतीत में सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनैतिक दृष्टि से प्रभावित व विकसित कला का व्यापक स्वरूप प्रस्तुत करती है।




संग्रह एवं प्रदर्शन

संग्रहालय भवन में भीतर 3 दीघाऐं है, शैव, वैष्णव व जैन एवं व्यंतर देव-देवी दीर्घा। इन दीर्घाओं में, शिव, शिव परिवार व देवी (शक्ति), विष्णु के दशावतार, भू-वराह, नृसिंह, वामन, कृष्णजन्म, बलराम, हरिहर, जैन तीर्थंकर, सूर्य, सरस्वती, कुबेर आदि की प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। शोकेस में छोटी किन्तु विशिष्ट प्रतिमाऐं एवं सिक्के तथा प्रागैतिहासिक अश्मोपकरणों एवं जीवाश्मो का प्रदर्शन किया गया है। संग्रहालय में प्रदर्शित व संग्रहीत पुरावशेषो में लगभग 318 पाषाण प्रतिमाऐं एवं वास्तु शिल्पखण्ड, 143 कलचुरि कालीन रजत मुद्राएं 86 रजत व 3 ताम्र, परवर्ती मुगल कालीन मुद्राऐं, 326 ब्रिटिश कालीन मुद्राएं 21 जीवाश्म तथा आदि मानव के अश्मोपकरणों (प्रीस्टिोरिक टूल्स) मृण्मय वस्तुऐं व पात्रावशेष का संग्रह है।

शैव दीर्घा

त्रिदेवों में प्रमुख शिव, महादेव है एवं पारिवारिक देवता रूप में पूज्य है। प्राचीन ग्रन्थों में शिव-सौम्य व रौद्र दोनों स्वरूपों में मिलते है। शिव परिवार में उमा या पार्वती, पुत्र कार्तिकेय व गणेश, वाहन नन्दी, सेवक भृंगी, नन्दिकेश्वर, वीरभद्र व अन्य शिवगण कलात्मकता के साथ शिल्पित मिलते है। इस दीर्घा में प्रमुख रूप से नृत्यरत गणेश, गौरी, उमा-महेश्वर, (रावणानुग्रह), उमामहेश्वर-चौसर खेलते हुए, नटेश शिव, शिव स्थानक, गणेश आसनस्थ, कार्तिकेय, पार्वती, महिषासुर मर्दिनी, चामुण्डा महेशवरी आदि की प्रमिमाऐं प्रदर्शन में है। इनमें चौसर खलते हुए शिव पार्वती एवं रावणानुग्रह प्रतिमाएं नटेश शिव शिल्पकला की दृष्टि से अनूठी है।




वैष्णव दीर्घा

त्रिदेवों में विष्णु को पालक देवता के रूप में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है। वैदिक काल से आज तक समाज में विष्णु व लक्ष्मी की प्रतिमाऐं श्रद्धा-भक्ति से पूजी जाती है। ब्राहम्ण ग्रन्थों (यथा-शतपथ एवं तैतरीय ब्राहम्ण) एवं पुराणों (श्रीमद् भागवत्, नारद, वराह आदि) में विष्णु के दशावतारों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस दीर्घा में स्थानक विष्णु, विष्णु दशावतार, योगनारायण, बैकुण्ठ विष्णु, हरिहर, नृसिंह, वामन, कृष्ण जन्म, बलराम आदि स्वरूपों की प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। इनमें बैकुण्ठ एवं विष्णु दशावतार, नृसिंह शिल्प शास्त्र की दृष्टि से उत्कृष्ट तथा इस संग्रहालय का गौरव है। ये प्रदर्शित-कौड़िया, अन्तरा, सोहागपुर, जोधपुर, नरसिंहगढ़ी, शाहपुर, कोटमा आदि स्थानों से संग्रहित की गई है। जैन एंव व्यंतर:- मुख्य रूप से इस दीर्घा में आदिनाथ, शान्तिनाथ, पार्श्वनाथ एवं महावीर स्वामी चन्द्रप्रभ की गोमेद और अम्बिका की महत्वपूर्ण प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। देवी सरस्वती, रति कामदेव, कुबेर, गज-शार्दूल आदि की प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। इसके अतिरिक्त शोकेसो में 7वीं, 8वीं शती ई. के शिव फलक, विष्णु फलक, नाग फलक प्रदर्शित है। त्रिमुखी शिव, जिनमस्तक, सरस्वती व दुर्गा एवं नायिकाओं का प्रदर्शन है। छोटे-शोकेसो में कुषाण कालीन ताम्र मुद्राएं, कलचुरि कालीन रजत मुद्राऐं, मुगल काल की ताम्र मुद्राऐं, ब्रिटिश कालीन रजत व ताम्र मुद्राओं का प्रदर्शन है।









फासिल्स (जीवाश्म):-

इस संग्रहालय में जीव एवं वनस्पति के लाखों वर्ष पुराने जीवाश्मों को भी रखा गया है।

अश्मोपकरण

जिले से संग्रहीत पूर्व पाषाण काल, मध्य पाषाण काल व नव पाषाण काल के आदि मानव के द्वारा उपयोग में लाये गये अश्मोपकरणों का प्रदर्शन शोकेसो में किया गया है।

परिसर में प्रदर्शन:-

परिसर में प्रदर्शित कलाकृतियों में-द्वार शाखाऐं, योगिनी, दिकपाल व नायिकाओं क विविध स्वरूप तथा साथ-साथ अलंकृत वास्तुशिल्प खण्ड प्रदर्शित किये गये है।



संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय
संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।
प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
प्रवेश शुल्क
भारतीय नागरिक रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)
विदेशी नागरिक रू. 50.00 प्रति व्यक्ति
फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा
विडियोग्राफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा
प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।