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District Archaeological Museum Vidisha

जिला पुरातत्व संग्रहालय, विदिशा

अभिलेखों आदि में इस नगर के कई नाम यथा- बेदसा, बेदिस वेसनगर, भेल्लस्वामिपुर, भेलसा, आलमगीरपुर मिलते हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में है। नगर में स्थित विश्राम भवन के समक्ष सन् 1964 में निर्मित संग्रहालय विदिशा ही नहीं वरन् सम्पूर्ण जिले के उत्थान-पतन की पुरा-सम्पदा को संजोये हुए है। यहाँ संग्रहीत कलात्मक कृतियां जिले की क्रमबद्ध कला का दिग्दर्शन कराती है। प्रदर्शित कलाकृतियों में शैव, वैष्णव, शाक्त, जैन एवं अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाऐं तथा विदिशा उत्खनन से प्राप्त पुरा सामग्रिया है। वर्तमान में इस संग्रहालय में लगभग 1700 पुरावशेष संकलित है। जिनमें से चयनित पुरावशेष व कलाकृतियां 3 प्रमुख दीर्घाओं में प्रदर्शित की गई है इन कलाकृतियों में से कुछ प्रमुख निम्न हैः-

यक्ष प्रतिमा- दूसरी शती ई.पू. की यक्षराज कुबेर की विशालतम (3.36xx1.36 मीटर) प्रतिमा सफेद बलुआ प्रस्तर पर निर्मित है। स्थानक कुबेर मस्तक पर उष्णीष सदृष्य पगड़ी, कानों में कुण्डल, गले में ग्रेवयक हार, हाथों में कंकण, बाजुबंद आदि आभूषणों से सुशोभित है। कुबेर का दायां हाथ भग्न है बाएं हाथ में धन की थैली है। बेसनगर से प्राप्त यह प्रतिमा प्राचीन समय में वहां की सुख-समृद्धि का प्रतीक है। यहाँ से प्राप्त यक्षी की प्रतिमा भी विशेष उल्लेखनीय है।

सूर्य प्रतिमा-

कमल पीठिका पर सूर्य समपाद मुद्रा में है। इनके दोनों हाथ भग्न हैं। परन्तु इन हाथों में धारण कमल पुष्पों का अंकन प्रतिमा में स्पष्ट है। सूर्य मस्तक पर किरीट मुकुट, कानों में रत्न कुण्डल, गले में हार, वक्ष पर कवच, माला तथा पैरों में उपान्ह (जूते) धारण किये है। प्रतिमा में सूर्य देव अपने परिवार के साथ है। पादपीठ पर सामने मध्य में महाश्वेता है, इनके दोनों ओर सूर्य की पत्नियां संध्या और छाया आभूषणों से सुशोभित होकर द्विभंग मुद्रा में है। संध्या और छाया के समीप अनुचर पिंगल एवं दण्डी है। नीचे ही प्रतिमा के दोनो ओर प्रमुख किरणें ऊषा और प्रत्यूषा अपने हाथों में तीर-कमान लिये हुए ऐसी मुद्रा में है मानों वे तीर-कमान से अंधकार को मिटा रही हो। प्रतिमा परिकर पर युगल विद्याधरों का अंकन है। परिकर पर तीन रथिकाऐं हैं जिनमें बांयी ओर चतुर्भुजी शिव, मध्य में चतुर्भुजी पद्मासन विष्णु तथा दायीं ओर चतुर्भुजी ब्रम्हा है। प्रतिमा गज शार्दुल एवं व्यालाकृतियां से भी अलंकृत है। लाल बलुआ प्रस्तर पर 1.18x1.00 मी. के आकार में निर्मित तथा विदिशा से प्राप्त यह प्रतिमा लगभग 9-10 वीं शती ई. की है। प्रतिमा-शास्त्रीय दृष्टिकोण से यह प्रतिमा अद्वितीय है।

जैन प्रतिमाऐं-

विदिशा के समीप दुर्जनपुर से प्राप्त जैन तीर्थंकर की तीन प्रतिमाएं पुष्पदंत एवं चन्द्रप्रभ की अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं किन्तु इन प्रतिमाओं को भोपाल स्थानान्तरित कर दिया गया है लेकिन संग्रहालय में कायोत्सर्ग एवं पदमानस्थ जैन प्रतिमाये प्रदर्शित हैं।







वैष्णव प्रतिमायें-

संग्रहालय में प्रदर्शित प्रतिमाओं में सर्वाधिक महत्वपूर्ण गरूड़ासीन विष्णु की द्वादशभुजी प्रतिमा, नृवराह व वामन की प्रतिमायें हैं, इसके अतिरिक्त शेषशायी विष्णु, चतुर्भुजी गरूड़ासीन विष्णु एवं विष्णु स्थानक प्रतिमायें प्रदर्शित हैं।







शैव प्रतिमायें--

संग्रहालय में प्रदर्शित प्रतिमाओं में गणेष की नृत्य एवं ललितासीन प्रतिमायें, शिव नटेश, उमा महेश्वर, भैरव आदि महत्वपूर्ण हैं।







अन्य प्रतिमायें-








संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय

संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।
प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
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भारतीय नागरिक रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)
विदेशी नागरिक रू. 50.00 प्रति व्यक्ति
फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा
विडियोग्राफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा
प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।