English हिंदी
District Archaeological Museum Mandsaur

संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय समय - प्रातः 10-00 से शाम 5-00 तक

प्रवेश शुल्क


भारतीय दर्शक -रू. 5.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)


विदेषी दर्शक - रू. 50.00 प्रति व्यक्ति

फोटोग्राफी - रू. 50.00 प्रति कैमरा


विडियों ग्राफी - रू. 200.00 प्रति कैमरा

नोटः-

  1. प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।
  2. प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।
Gujri-Mahal-Museum

मध्यप्रदेश के उत्तरी पश्चिमी भाग में मालवा के पठार पर स्थित मंदसौर जिला की अपनी विशिष्ट पहचान है। जिला मुख्यालय मंदसौर, इन्दौर से 235 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। इस क्षेत्र में अरावली तथा विंध्य पर्वत श्रंखलाएं फैली हुई हैं तथा चंबल और शिवना दो प्रमुख नदियां हैं। धर्म, कला, साहित्य, एवं सांस्कृतिक वैभव से परिपूर्ण मंदसौर शिवना नदी के तट पर स्थित म.प्र. का प्राचीन नगर है. जिसकी पहचान इतिहासकारों व पुराविदों ने प्राचीन दशपुर से की है।

मंदसौर क्षेत्र में किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों से पाषाणयुगीन उपकरण एवं उत्खननों में ताम्रशमयुगीन से मराठाकाल तक के सांस्कृतिक अनुक्रम मिले हैं, साथ ही इस क्षेत्र में अनेक प्राचीन मंदिर, दुर्ग, छत्रियां, शैलचित्र आदि स्थापित हैं। इस जिले की कलाकृतियां एवं शैलचित्र देश में ही नहीं वरन विदेशों में भी विख्यात हैं।

संग्रहालय में 4थी शती ई. से 18वी शती ई. की अनेक प्रतिमाए संग्रहीत हैं इनमें कतिपय प्रतिमायें दुर्लभ हैं। प्रतिमाओं व कलाकृतियों को शैव, वैष्णव, जैन, नायिका एवं देवी वीथिका में निम्नानुसार विभाजित कर प्रदर्शित किया हैः

Gujri-Mahal-Museum

शैव वीथिका

Gujri-Mahal-Museum

इस वीथिका में मंदसौर जिले के हिंगलाजगढ़, नीमच, झारड़ा, अफजलपुर, चन्द्रपुरा, मंदसौर आदि स्थलों से प्राप्त शिव के विभिन्न स्वरूप व काल में निर्मित प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है इनमें सदाशिव, कल्याण-सुन्दर, रूद्र, भैरव, नटराज, उमा-महेश्वर मुख्य हैं। इसके अतिरिक्त गणेश, कार्तिकेय, रूद्र भास्कर, आदि की प्रतिमायें प्रदर्शित हैं।

Gujri-Mahal-Museum

वैष्णव वीथिका

Gujri-Mahal-Museum

इस वीथिका में मंदसौर जिले के हिंगलाजगढ़, रामपुरा, पाडलिया, चन्द्रवासा, अजयपुर, झारड़ा, भूखीमाता मंदसौर आदि स्थलों से प्राप्त विष्णु के विभिन्न स्वरूप व काल में निर्मित प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है इनमें वेणुगोपाल, नृसिंह, गरूडासीनविष्णु, लक्ष्मीनारायण मुख्य हैं।

Gujri-Mahal-Museum

nsoh ohfFkdk%&

इस वीथिका में मंदसौर जिले के हिंगलाजगढ़, सेजपुरिया, गरोठ, अफजलपुर, कैथुली, पाडलिया, मंदसौर आदि स्थलों से प्राप्त भू-देवी, गजलक्ष्मी, दुर्गा, महिषासुरमर्दिनी, पार्वती, गौरी, माहेशवरी, कौमारी, तथा चामुण्डा की प्रतिमायें प्रदर्शित हैं। इनके अतिरिक्त बौद्ध देवी मारीचि, एवं हारीति की प्रतिमायें विशेष उल्लेखनीय है, शीतलादेवी की प्रतिमा में वाहन गदर्भ के पैरों के बीच में सदाशिव का शिल्पांकन अनूठा है। उक्त प्रतिमाओं का काल 7वी शती ई. से 13वी शती ई. है।

Gujri-Mahal-Museum

जैन वीथिका

Gujri-Mahal-Museum

इस वीथी में पाडलिया मारू, हिंगलाजगढ़, एवं मन्दसौर नगर आदि स्थानों से प्राप्त तीर्थंकर, पट्ट आदि जैन प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है जो 10वीं से लेकर 14वीं शती ई, की हैं।

Gujri-Mahal-Museum

नायिका वीथिका

इस वीथी में हिंगलाजगढ़, से संबंधित नायिका एवं युगल (मिथुन) प्रतिमायें प्रदर्शित की गई है, ये प्रतिमायें परमारकालीन 10वीं शती ई. से लेकर 14वीं तक की हैं। इन प्रतिमाओं में श्रॅगारिका, पदम् हस्ता, सद्यस्नाता, पत्रलेखा, विषकन्या, मालाधारिणी आदि हैं।

Gujri-Mahal-Museum

मुक्ताकांश प्रदर्शन

Gujri-Mahal-Museum