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महाराजा छत्रसाल संग्रहालय छतरपुर

संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा

प्रवेश शुल्क:

भारतीय नागरिक रू. 10.00 प्रति व्यक्ति (15 वर्ष तक के बच्चे निशुल्क)

विदेशी नागरिक रू. 100.00 प्रति व्यक्ति

फोटोग्राफी शुल्क रू. 50.00 प्रति कैमरा

विडियोग्राफी शुल्क रू. 200.00 प्रति कैमरा

नोट:-

  1. प्लास्टर कास्ट एवं प्रकाशन विक्रय केन्द्र पर विभागीय प्रकाशन की पुस्तकें, फोल्डर, पोस्ट कार्ड एवं प्लास्टर कास्ट प्रति कृतियां उपलब्ध हैं।
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महाराजा छत्रसाल संग्रहालय, धुबेला, छतरपुर

महाराजा छत्रसाल संग्रहालय धुबेला महल में स्थित है, जो छतरपुर से 17 किमी. दूरी पर छतरपुर नौगांव मार्ग पर मऊ नामक गांव से 1-6 किमी. की दूरी पर अवस्थित है। यह महल उत्तर मध्य कालीन क्षेत्रीय स्थापत्य का उत्तम नमूना है, निर्माणकाल 18वीं शती ई. निर्धारित की जा सकती है। इस भवन का निर्माण महाराज छत्रसाल बुन्देला ने करवाया था और यह उनका सभा भवन था। इसी भवन में मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित महाराज छत्रसाल संग्रहालय है, इसका उद्धाटन 12 सितम्बर 1955 में भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू के कर कमलों से हुआ था। इस संग्रहालय में बुन्देलखण्ड एवं बघेलखण्ड की पुरासामग्री सुरक्षित है, जो वीथिकाओं एवं खुले में प्रदर्शित है।

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अभिलेख वीथी--

इस वीथी में चौथी शती से 18वीं शती ई. तक के अभिलेख प्रदर्शित है, जिनमें महाराजा वंगेश्वर का देवगवा शिवलिंग शिलालेख, महाराजा स्कंदगुप्त का सुपिया शिलालेख, कर्णदेव कलचुरि का गुर्गी शिलालेख, गंगेयदेव कलचुरि का मुकुन्दपुर शिलालेख, कर्णदेव कलचुरि का रीवा शिलालेख, कलचुरि नरेश विजय सिंह का कस्तारा शिलालेख, विजयसिंह देव कलचुरि का रीवा शिलालेख, कलचुरि नरेश कोकल्लदेव द्वितीय का गुर्गी शिलालेख, रीवा नरेश अरियार देव बधेला का शिलालेख, महाराज वीरसिंह जूदेव बुन्देला का ओरछा शिलालेख, इसके अलावा नवाताल, रीवा, जसकेरा, वैकुण्ठपुर, बरारी आदि स्थानों से प्राप्त सती स्तम्भ लेख प्रदर्शित है।

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Jaina Gallery Tirthankara Aadinatha(10th c.AD)

जैन वीथी--

इस वीथी में बुन्देलखण्ड एवं बघेलखण्ड से संग्रहीत चन्देल एवं कलचुरि प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। इनमें तीर्थंकर आदिनाथ, शक्तिनाथ, नाभिनाथ, नेमिनाथ, पार्शवनाथ एवं लाछन विहीन तीर्थंकर प्रतिमा द्वितीथीं, सर्वेतोमाद्रिका यक्ष एवं याक्षियों की स्वतंत्र प्रतिमाऐं है। कुछ प्रतिमाओं के पादपीठ पर वि.स. 1128 (ई.स.1071)वि.स. 1220 (ई.स.1163) वि.स. 1199 (ई.स.1142) के चन्देल कालीन अभिलेख उत्कीर्ण है।

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शैव शाक्त वीथी-

इस वीथी में बुन्देलखण्ड एवं बघेलखण्ड से प्राप्त महत्वपूर्ण शैव शाक्त प्रतिमाऐं प्रदर्शित है। षैव प्रतिमाओं में शिवलिंग, शिव का रावणानुग्रह, उमा महेश्वर, भैरव स्वरूप, गणेश, कार्तिकेय की प्रतिमा एंव लगभग 18वीं शती ई. की नन्दी प्रतिमा है। शाक्त प्रतिमायों में चैसठ योगनी की 10वीं शती, 11वीं शती प्रतिमा गोरगी (रीवा) व शहडोल से प्राप्त हुई है। इनमें मुर्गी की जउति, बदरी, भा, इतरला, की प्रतिमा शहडोल की तरला, तारणी, वाणाप्रभा, कृष्ण भगवती, रमणी, वासवा, कपालिनी व चपला की प्रतिमाऐं उल्लेखनीय है, इन योगनी प्रतिमाओं के पादपीठ पर, पंक्ति नाम उत्कीर्ण है।

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ललितकला वीथी-

इस वीथी में हाथी दांत, कांच, काष्ट, धातु, मृणमूर्तियां, ललितकला की सामग्री प्रदर्शित है। इनमें गुप्तकालीन लज्जागौरी, माता आदिति की प्रतिमा मृणमय है। लगभग 19वीं-20 वीं शती ललितकला से संबंधित अवशेष है। महाराजा छत्रसाल का अंगरखा, रीवा व चरखारी रियासत के राज्य परिवार से वस्त्र उल्लेखनीय है।

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वैष्णव वीथी-

इस वीथी में बुन्देलखण्ड एवं बघेलखण्ड की महत्वपूर्ण चन्देल एवं कलचुरि कालीन प्रतिमाऐं प्रदर्शित है, इनमें शेषशायी, विष्णु, सूर्य, विष्णु का वामन, परशुराम व हरिहर पितामह, विष्णु के चतुविशंति स्वरूप में त्रिविक्रम रूप है मोहनगढ़ से प्राप्त दुलर्भप्रतिमा यज्ञवेदका है, जो लगभग 8वीं शती ई. की है। खजुराहों से प्राप्त मिथुन प्रतिमा इस वीथी का विशेष आकर्षण है।

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चित्रकला वीथी-

इस वीथी में बुन्देलखण्ड एवं बघेलखण्ड के शासकों के व्यक्तिचित्र, कृष्ण लीला, राम कथानक से संबंधित लघुचित्र है। बुन्देला शासकों में महाराजा छत्रसाल, चरखारी नरेश, विजय बहादुर सिंह जूदेव, एवं रतन सिंह जूदेव, विजावर नरेश सामन्त सिंह जूदेव, रीवा के महाराजा रामचन्द्र रामराजसिंह जूदेव, विश्वनाथ सिंह जूदेव, रघुराज सिंह जूदेव, गुलाब सिंह जूदेव, कप्तान प्रतापसिंह, माधोगढ़ नरेश बड़े बाबू साहेब रामराज सिंह, अमर पाटन नरेश रावेन्द्र साहब, बलभद्रसिंह, रीवा की स्वामी परम्परा, रीवा नरेश गुलाब सिंह की बरात का दृष्य उल्लेखनीय है। इसके अलावा कृष्ण लीला राम कथानक से संबंधित चित्र है। इसी वीथी के अन्दर विनोद वीथी में बड़े -बड़े दर्पण लगे हुये है, जिसमे भांति-भांति रूप में शारीरिक विन्यास दिखता है जो विनोद के प्रतीक है।

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अस्त्र-शस्त्र वीथी-

संग्रहालय की इस वीथी में रीवा, छतरपुर, पन्ना, चरखारी रियासतों तथा कुछ स्थानीय लोगों से प्राप्त हुये शस्त्र प्रदर्शित है इनमें तलवार, ढाल, तेगा, खाड़ा, धनुष-वाण, फरशा, गदा, भाला, खुकरी, अंकुश, नराच, गुर्ज, कुंलग, पंजा, बर्छी, संका, कटार, टोप, वृक्ष कवच, दस्ताना, छोटी बंदूक, छड़ीदार बन्दूक, लोहे की कुल्हाड़ी, बड़ी बन्दूक, संगीन आदि हथियार है। रायमन दौवा की तलवार एवं आदिल शेरशाह की तोप उल्लेखनीय है इस तोप पर शक सवत् 1628 (ई.स. 1702) का लेख उत्कीर्ण है।

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खुले में प्रदर्शित प्रतिमाऐं

महल के ऊपरी चौक में शिव, उमा महेश्वर, हरिहर, शिवगण, गणेश, दुर्गा, अम्बिका, विष्णु, कुबेर, अप्सरा, युगल, कीचक, जिन प्रतिमा आदि महत्वपूर्ण मध्य कालीन प्रतिमाओं का प्रदर्शन है। नीचे के चैक में उमा महेश्वर, लक्ष्मी, नारायण, योग नारायण, शाईल, स्तम्भ, आमलक कलश, धूप धंडी, लधु शिरतर, स्थापत्य खण्ड एवं प्रतिमाऐं प्रदर्शित है।

ग्रंथालय-

संग्रहालय से संबंधित एक ग्रंथालय भी है, जिसमें लगभग 2300 पुस्तकों का संग्रह है, जिसमे इतिहास, पुरातत्व से संबंधित पुस्तकों को रखा गया है। इसके अलावा विभागीय प्रकाशन व प्लास्टर कास्ट विक्रय की भी व्यवस्था है।