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Bhanpura, Mandsaur

स्थानीय संग्रहालय भानपुरा, मंदसौर

भानपुरा संग्रहालय, जिला मुख्यालय मंदसौर से 134 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। जिले के पूर्वांचल में अरावली की हरीतिमा से घिरे सदानीरा रेवा के तट पर प्राचीन ऐतिहासिक-संस्कृतिक नगर भानपुरा अवस्थित है। यह क्षेत्र पुरातत्वीय दृष्टिकोण से विशेष महत्वपूर्ण है, इस क्षेत्र में अनेक प्राचीन मंदिर दुर्ग, छत्री, शैलचित्र स्थापित है, इस क्षेत्र की कलाकृतिया एवं शैलचित्र देश में ही नहीं वरन विदेशों में भी विख्यात हैं। यह स्थानीय पुरातत्व संग्रहालय, भानपुरा में होलकर शासक यशवन्तराव प्रथम (1799-1811 ई.) की छत्री में स्थित है। यह भवन मराठा वास्तु विन्यास का सुन्दर उदाहरण है। छत्री विशाल मंदिर के रूप में परकोटे में घिरी एक किलानुमा गढी के अन्दर स्थित है जिसका प्रमुख प्रवेश द्वार पूर्वी ओर है। यह छत्री विभाग का संरक्षित स्मारक भी है। इस क्षेत्र की पुरातत्वीय धरोहर से प्रभावित होकर तत्कालीन होलकर नरेश यशवंतराव द्वितीय ने सन् 1943 में इस छत्री में संग्रहालय की स्थापना की। उसके पश्चात् म.प्र. पुरातत्व विभाग द्वारा गांधीनगर जलाशय के डूब में आये अनेक ग्रामों से कलाकृतियों को एकत्रित कर इस संग्रहालय में संग्रहीत किया गया। इस संग्रहालय में मोड़ी, इन्द्रगढ़, हिंगलाजगढ़, हरीपुरा, लोटखेडी, अन्सर, बुजकुण्ड, भुंजर, सीताखर्डी, कुना, भानपुरा, नीमथुर, कंवला, सुजानपुरा, चम्बलडेम, कुण्डी, शॅखोद्वार, भुजकुण्ड आदि स्थानों की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं जो उत्कृष्ट शिल्पकला की अनमोल विरासत हैं। हिंगलाजगढ़ दुर्ग से सर्वाधिक मूर्तियां संग्रहीत की गयी हैं। प्रतिमाओं व कलाकृतियों को शैव, वैष्णव, जैन, नायिका एवं देवी वीथिका में निम्नानुसार विभाजित कर प्रदर्शित किया हैः-

शैव वीथिका:-

इस वीथिका में शिव की विभिन्न प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है इनमें शिव-अंधकासुर वध, लकुलीश, गणेश, नंदी, सदाशिव, हरिहर, भैरव, नटराज, उमा-महेश्वर मुख्य हैं। इस दीर्घा में प्रदर्शित नंदी प्रतिमा विदेशों में आयोजित भारत महोत्सव प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।







वैष्णव वीथिकाः-

इस वीथिका विष्णु के विभिन्न स्वरूप व काल में निर्मित प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है इनमें योगनारायण, सूर्यनारायण, रेवन्त, बैकुन्ठनारायण, गरूडासीनविष्णु, लक्ष्मीनारायण मुख्य हैं।






देवी वीथिकाः-

इस वीथिका में महिषासुरमर्दिनी, पार्वती, गौरी, कौमारी, वैष्णवी, ब्रह्माणी, इन्द्राणी, वाराही, सरस्वती, लक्ष्मी तथा चामुण्डा की प्रतिमायें प्रदर्शित हैं। उक्त प्रतिमाओं का काल 8वी शती ई. से 13वी शती ई. है। जैन एवं बौद्ध वीथिकाः- इस वीथी में तीर्थंकर, यक्ष-यक्षी आदि जैन प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है जो 10वीं से लेकर 14वीं शती ई. की हैं।





नायिका वीथिकाः-

इस वीथी मे प्रदर्शित की गई है, ये प्रतिमायें परमारकालीन 10 वीं शती ई. से लेकर 14वीं तक की हैं। इन प्रतिमाओं में श्रॅगारिका, पद्महस्ता, मृदंगवादिका, पद्मधारिणी, कर्पूरमन्जरी, मिथुन, देवागंना, आदि हैं। शिल्प में रस परिपाद का संयोजन नायिका प्रतिमाओं के अंकन में हुआ है, अंगों में लोच, आकर्षण, भंगिमा, भावानुभव तथा रूप को मर्यादा में बाँधने का प्रयास दिखलाई पड़ता है। भानपुरा क्षेत्र की पुरातन संपदा विशेष महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि कला के क्षेत्र में इस भू-भाग ने अपनी स्वतंत्र शिल्प शैली को जन्म दिया और उसे पल्लवित-पुष्पित भी किया। भानपुरा संग्रहालय की कलाकृतियां राष्ट्रकूट व परमार कला की उत्कृष्ट कृतियां हैं। अपनी विषिष्ट शैली के लिए विख्यात दशपुर अंचल का महत्वपूर्ण कलाकेन्द्र हिंगलाजगढ़ भानपुरा के समीप स्थित है। हिंगलाजगढ़ की कई उत्कृष्ट प्रतिमामें इस संग्रहालय में प्रदर्शित हैं।





संग्रहालय खुलने व बन्द होने का समय

संग्रहालय खुलने का समय प्रातः 10 बजे से सायः 5 बजे तक।
प्रत्येक सोमवार एवं शासकीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहेगा।