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तुलसी संग्रहालय रामवन सतना

संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय म.प्र. भोपाल के अधीन विन्ध्य क्षेत्र का महत्वपूर्ण संग्रहालय जिला मुख्यालय सतना से रीवा रोड पर 16 कि.मी. की दूरी पर स्थित मुख्य सज्जनपुर के समीप दक्षिणी ओर लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस संग्रहालय की स्थापना सतना के सेठ बाबू शारदा प्रसाद जी ने विन्ध्य अंचल की पुरासम्पदा को एकत्र कर अपने पिता की स्मृति में इस संग्रहालय को स्थापित किया। संग्रहालय के लिये पुरासामग्री संकलन का कार्य वर्ष 1936 में रामवन आश्रम की स्थापना की। 1939 में मानस संघ ट्रस्ट बना, जिसके अधीन सितम्बर 1959 में तुलसी संग्रहालय स्थापित हुआ। संग्रहालय के लिये पुरासामग्री संकलन कार्य सन 1925 से 1957 तक चलता रहा, जिसमें प्रस्तर प्रतिमाऐं, हस्तलिखित ग्रन्थों, कलाकृतियों एवं अन्य पुरावशेष शामिल है। संग्रहालय की स्थापना के साथ ही तुलसी पुस्तकालय की स्थापना भी इसी संग्रहालय भवन में की गई। वर्ष 1978 में यह संग्रहालय म.प्र. पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को दान में प्राप्त हुआ।

वर्तमान संग्रहालय भवन यद्यपि 1959 में बना, किन्तु इसमें आवश्यक सुधार व सुरक्षा व्यवस्था कर वीथिकाऐं बनायी गयी है। संग्रहालय भवन में 9 कक्ष है, जिसमें भरहुत, गुप्त, जैन, शैव, वैष्णव, एंव अन्य कलाकृतियों की वीथिकायें है। वर्तमान में इस संग्रहालय में 2,368 पुरावशेष संग्रहित है, जिनमें पाषाण प्रतिमाऐं, धातु प्रतिमाऐं, ताम्र पत्र, लेख, सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्के शामिल है। ये पुरावशेष सतना जिले के भरहुत, भुमरा, उचेहरा, दुरेहा, धोह, जसो, गोहमी, मैहर, कोटर, सतरी, अमरपाटन, मड़ई, बालूपुर, भटूरा, मरोपहाड़ी, सरिया टोला, सज्जनपुर, जरिहा, मिरगोली, शहडोल जिले के सोहागपुर, सीधी जिले के ममोसी, रीवा जिले के गुर्गी, छतरपुर जिले के खजुराहो, पन्ना जिले के नचना स्थान से संग्रहित किये गये है। इसके अलावा भीटा (उ.प्र.), बोधगया (बिहार) एवं काठमाण्डू (नेपाल) से भी कुछ पुरावशेष संग्रहीत है।

भरहुत वीथिका-

सतना जिले का महत्वपूर्ण पुरातत्वीय स्थल भरहुत बौद्ध स्तूप के अवशेषो के लिये प्रसिद्ध है। यद्यपि यहाँ के अधिकांश अवशेष इण्डियन म्यूजियम कलकत्ता और इलाहाबाद संग्रहालय में संग्रहित है, किन्तु 81 कलावशेष इस दीर्घा में प्रदर्शित है। इसमें विशेष उल्लेखनीय अवशेषों में स्तूपवेदिका के सूची खण्ड, स्तंभ खण्ड, विकसित पदम, संरचना युक्त कलावशेष, स्तम्भ शीर्ष आदि हैं।






गुप्तकालीन वीथिका-

इस वीथिका में प्रदर्शित कलाकृतियां खोह, भूमरा, दुरेहा, व भटूरा से संग्रहित की गई है। वीथिका में प्रदर्शित महत्वपूर्ण कलाकृतियों में शिव, पार्श्वनाथ, हिरण, रीछ, आदि सहित 30 नग कलाकृतियां प्रदर्शित है। इनमें महत्वपूर्ण प्रतिमायें वीणाधर, शिव, पार्वती, कौमारी, शिव,पार्वती, चैत्यगवाक्ष में शिव पार्वती, शिवगण विष्णु, पार्श्वनाथ, शिव प्रतिमा परिकर, महिषमर्दिनी आदि हैं।






जैन वीथिका-

इस वीथिका में प्रदर्शित प्रतिमाऐं गुर्गी, मड़ई, अमरपाटन, से एकत्रित की गयी है और सभी कलचुरिकालीन है। इनमें 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमाऐं प्रमुख है इनके अतिरिक्त आदिनाथ, चन्द्रप्रभु, नेमिनाथ की प्रतिमाऐं प्रदर्शित की गयी है। ये सभी 11-12वीं शती ई. की है।






शैव एवं व्यन्तर देव-देवी वीथिका-

इस दीर्घा में प्रमुख रूप से शैव धर्म की प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है, जो उचेहरा, सोहागपुर, बाबूपुर, से संकलित है। इनमें उमा-महेश्वर, वीणाधर शिव प्रमुख है। शेष प्रतिमाओं में चामुण्डा, योगिनी तथा सूर्य, दिक्पालों में यम-नैऋति व वरूण की प्रतिमाऐं है।






वैष्णव वीथिका-

वैष्णव वीथिका में प्रमुख रूप से विष्णु एवं उनके अवतारों की प्रतिमाएं प्रदर्शित है। इनमें विष्णु, लक्ष्मी नारायण, भूवराह, गजेन्द्र-मोक्ष आदि प्रमुख है। ये सभी प्रतिमाएं उत्तर मध्यकाल में निर्मित हुई हैं तथा विंध्य क्षेत्र के सोहागपुर, बाबूपुर, सतरी, नचना आदि स्थानों में संकलित की गयी है।

 

 






आरक्षित संकलन 
विशिष्ट प्रतिमाऐं-

तुलसी संग्रहालय के आरक्षित संकलन में गुप्तकालीन बोधगया (बिहार) से प्राप्त दो लघु स्तूप जिनमें एक में स्तूप के चारों ओर चार बुद्ध प्रतिमाओं का अंकन है, जो ध्यानस्थ है तथा दूसरे लघु स्तूप में एक ओर बुद्ध को ध्यानावस्था में दर्शाया गया है। स्तूप के ऊपर छत्र, हर्मिका एवं वेदिका का अंकन है। कलचुरि कालीन सोहागपुर से प्राप्त विष्णु मस्तक कलचुरिकला का श्रेष्ठतम उदाहरण है, आरक्षित संकलन में 70 बौद्ध धर्म से संबंधित शिल्पखंड, 75 जैन प्रतिमाऐं, 90 वैष्णव प्रतिमाऐं तथा 65 शैव प्रतिमाऐं है। इनके अतिरिक्त प्रभूत मात्रा में व्यन्तर देवी-देवताओं एंव स्थापत्य खंड भी संकलन में है।

उत्कीर्ण लेख-

संग्रहालय के संकलन में एक ताम्रपत्र लेख चंदेल शासक त्रैलोक्यवर्मन का है, जिसमें एक ग्राम दान का उल्लेख है। लेख में चंदेल शासकों की वंशावली दी है। इसके अतिरिक्त दो छोटे-छोटे ब्राम्ही लेख भरहुत के भग्न कलावशेषो में है। एक बुद्ध प्रतिमा लेख प्रतिमा पादपीठ (चौकी) पर कीलाक्षर में नागरी लिपि में है तथा एक सती स्तंभ लेख भी संकलित है।

सिक्के-

तुलसी संग्रहालय में 1135 सिक्के संग्रहीत हैं जिनमें 8 स्वर्ण, 245 चांदी एवं 842 ताम्बे के है। सोने के सिक्कों में समुद्रगुप्त का अश्वमेध प्रकार एवं धनुर्धर प्रकार, चन्द्रगुप्त द्वितीय का अश्वारोही प्रकार तथा कुमार गुप्त का धनुर्धर प्रकार है। शेष चार स्वर्ण सिक्कों में एक औरंगजेब, दो विजय नगर के शासक हरहिर एवं देवराय के हैं एवं एक सिंधण सिक्का है। चांदी के सिक्कों में इण्डोग्रीक्स, नहपान, क्षत्रप् एवं गुप्त शासकों के सिक्के है। मुगल शासकों में अकबर, जहांगीर एवं औरंगजेब के सिक्कों का बाहुल्य है। शेष सिक्के देशी रियासतों एवं विदेशों के है। तांबे के सिक्कों में आहत मुद्राएँ, कुषाण, नाग, मुस्लिम शासकों, देशी रियासतों एवं ब्रिटिश भारत के है।

तुलसी ग्रन्थालय

तुलसी गन्थालय में 25000 ग्रंथों का सुन्दर संग्रह है। प्राचीन भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर, प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थ होते हैं, जो इस ग्रन्थालय में लगभग 2500 है। इनमे 7 सचित्र हस्तलिखित ग्रन्थ है। इनमें संवत 1851 में रचित रामायण है, जिसमें रामकथा के सुंदर रंगचित्र बने है। शेष 6 सचित्र हस्तलिखित ग्रंथ पंचरत्न भगवद्गीता के है। करीब 100 ग्रन्थ ताड़पत्र पर उड़िया भाषा में उत्कीर्ण है। ये रामकथा से संबंधित है तथा 300 से 400 वर्ष प्राचीन है। भोजपत्र पर संस्कृत में एक हस्तलिखित भगवतगीता है, जो लगभग 200 वर्ष प्राचीन है। कागज पर तीन हस्तलिखित काष्मीरी गीता लगभग 250 वर्ष प्राचीन है।

यहां के संग्रह में दो अनूठे हस्तलिखित ग्रंथ है, इनमें एक है, बलभद्र की टीकायुक्त भगवतगीता जो मूलरूप में केवल यहीं है तथा दूसरा हस्तलिखित ग्रंथ है मेघदूत की पंजरिका जो मल्लिनाथ सुत द्वारा रचित संवत 1522 की है। अन्य हस्तलिखित ग्रंथो में गुरू ग्रन्थ साहिब, रीवा के महाराजा विश्वनाथ सिंह द्वारा रचित रामायण, आध्यात्म रामायण की ध्वनि प्रकाश टीका एंव महाराजा रघुराज सिंह रचित आनन्दाम्बुनिधि एवं श्रीमद् भागवत का अनुवाद है। इनके अलावा करीब 1000 हस्तलिखित ग्रन्थ कर्मकाण्डों पर तथा करीब 250 हस्तलिखित ग्रंथ शैव, शाक्त, वैद्यक एवं ज्योतिष पर है।

हस्तलिखित ग्रन्थों के अलावा छपी पुस्तकों का सुन्दर संग्रह यहां के ग्रंथालय में है। प्राचीन वैदिक, पौराणिक, वैष्णव, शैव, शाक्त, तंत्र, कृष्ण, राम, जैन, बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम ग्रंथों से लेकर आधुनिक साहित्य में विविध विद्वानों, मनीषियों, कवियों, लेखकों, उपन्यासकारों, समालोचकों की पुस्तकों का उत्तम संग्रह यहां के ग्रंथालय में उपलब्ध है। गीता, तुलसी एवं राम साहित्य का प्रचुर भण्डार देश की समस्त भाषाओं में यहां उपलब्ध है। 
इस संदर्भ ग्रंथालय से षोधार्थी एवं आमजन लाभान्वित हो रहे है।

समय - प्रातः 10 से शाम 5 बजे तक
प्रवेश शुल्क
1- भारतीय दर्शक रू. 10.00 
2- विदेशी दर्शक रू. 100.00 
3- फोटोग्राफी रू. 50.00 
4- विडियों ग्राफी रू. 200.00 
नोटः- 1- 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों एवं विकलांग के लिये प्रवेश निशुल्क रहेगा।
2- सोमवार राजपत्रित अवकाश के दिन संग्रहालय बंद रहेगा।